कैसे इस्तेमाल करें
- टैक्स ईयर चुनें: टैक्स ईयर 2026-27 (इनकम-टैक्स एक्ट, 2025) या FY 2025-26 (AY 2026-27, पुराना 1961 वाला एक्ट)।
- अपनी सालाना ग्रॉस सैलरी या पेंशन (Form 16 वाली) और ब्याज जैसी दूसरी आय अलग-अलग लिखें, और अपनी उम्र का वर्ग चुनें। स्टैंडर्ड डिडक्शन सिर्फ़ सैलरी या पेंशन पर मिलता है।
- अगर एम्प्लॉयर आपके NPS खाते में पैसा डालता है तो वह राशि और अपना बेसिक + DA लिखें। फिर पुरानी व्यवस्था की कटौतियाँ भरें: 80C, अपने परिवार और माता-पिता का हेल्थ इंश्योरेंस, होम लोन ब्याज, HRA छूट और बाकी।
- देखें कि कौन-सी व्यवस्था बेहतर है और कितनी बचत होती है। हर व्यवस्था के कार्ड में कुल टैक्स, महीने का टैक्स और स्लैब-दर-स्लैब हिसाब मिलता है।
टैक्स ईयर 2026-27: क्या बदला
1 अप्रैल 2026 से इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 ने 1961 वाले एक्ट की जगह ले ली है। अब जिस साल में कमाई होती है उसे सीधे "टैक्स ईयर" कहते हैं, इसलिए जो आय पहले FY 2026-27 कहलाती थी (जिसका असेसमेंट AY 2027-28 में होता), वह अब टैक्स ईयर 2026-27 है। दरें नहीं बदलीं, पर सेक्शन नंबर बदल गए: रिबेट अब सेक्शन 156 (पुराना 87A), 80C सेक्शन 123, 80D सेक्शन 126, एम्प्लॉयर का NPS सेक्शन 124 और होम लोन ब्याज सेक्शन 22 (पुराना 24(b)) है।
नई व्यवस्था के टैक्स स्लैब (टैक्स ईयर 2026-27)
सैलरी या पेंशन पाने वालों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है (सैलरी इससे कम हो तो उतना ही)। सेक्शन 156 (पुराना 87A) का रिबेट (₹60,000 तक) ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर टैक्स शून्य कर देता है।
- ₹4,00,000 तक: शून्य
- ₹4,00,001 – ₹8,00,000: 5%
- ₹8,00,001 – ₹12,00,000: 10%
- ₹12,00,001 – ₹16,00,000: 15%
- ₹16,00,001 – ₹20,00,000: 20%
- ₹20,00,001 – ₹24,00,000: 25%
- ₹24,00,000 से ऊपर: 30%
पुरानी व्यवस्था के टैक्स स्लैब (60 साल से कम)
60 से 80 साल की उम्र में बेसिक छूट ₹3,00,000 और 80 साल से ऊपर ₹5,00,000 है। स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 है, और रिबेट से ₹5 लाख तक की टैक्सेबल आय पर टैक्स शून्य हो जाता है।
दोनों व्यवस्थाओं में 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस लगता है, और ₹50 लाख से ऊपर की आय पर सरचार्ज भी। टैक्सेबल आय और टैक्स नज़दीकी ₹10 तक राउंड होते हैं (सेक्शन 516)।
- ₹2,50,000 तक: शून्य
- ₹2,50,001 – ₹5,00,000: 5%
- ₹5,00,001 – ₹10,00,000: 20%
- ₹10,00,000 से ऊपर: 30%
कटौतियाँ जो कैलकुलेटर गिनता है
- सेक्शन 123 (पुराना 80C: PF, ELSS, LIC, PPF वगैरह): ज़्यादा से ज़्यादा ₹1,50,000, सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में।
- सेक्शन 126 (पुराना 80D, हेल्थ इंश्योरेंस): आपके, जीवनसाथी और बच्चों की पॉलिसी पर ₹25,000 (इनमें कोई 60 या ज़्यादा का हो तो ₹50,000), और माता-पिता की पॉलिसी पर अलग से ₹25,000 (माता या पिता 60 या ज़्यादा के हों तो ₹50,000)। हेल्थ चेक-अप ₹5,000 तक इन्हीं सीमाओं में गिना जाता है।
- अपने रहने वाले घर के होम लोन का ब्याज, सेक्शन 22 (पुराना 24(b)): ₹2,00,000 तक; लोन मरम्मत के लिए हो या घर लोन वाले साल के 5 साल बाद तक न बना हो तो ₹30,000 तक। सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में।
- एम्प्लॉयर का NPS योगदान, सेक्शन 124 (पुराना 80CCD(2)): यह आपकी सैलरी का हिस्सा है और Form 16 की ग्रॉस सैलरी में पहले से शामिल होता है (आपकी रकम में न हो तो बॉक्स पर टिक करें)। कैलकुलेटर इसे घटाता है: नई व्यवस्था में बेसिक + DA का 14% तक, पुरानी में 10% (केंद्र या राज्य सरकार के एम्प्लॉयर के लिए 14%)।
उदाहरण: किसमें कितना टैक्स
₹12,75,000 सालाना सैलरी, कोई कटौती नहीं: नई व्यवस्था में ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल आय ₹12,00,000 रहती है, और रिबेट से टैक्स ₹0 बनता है। पुरानी व्यवस्था में यही टैक्स ₹1,87,200 है।
₹15 लाख सैलरी, 80C में ₹1,50,000 और 80D में ₹25,000: नई व्यवस्था में कुल टैक्स ₹97,500, पुरानी में ₹2,02,800। यहाँ नई व्यवस्था में ₹1,05,300 की बचत है।
इसी ₹15 लाख पर अगर ₹2,00,000 होम लोन ब्याज और ₹2,00,000 HRA छूट व दूसरी कटौतियाँ भी हों, तो पुरानी व्यवस्था में टैक्स ₹91,000 रह जाता है, जबकि नई में ₹97,500। अब पुरानी व्यवस्था ₹6,500 सस्ती पड़ती है।
ध्यान दें
ये अनुमान भारत में रहने वाले (resident) व्यक्तियों की सैलरी और स्लैब-रेट वाली दूसरी आय के लिए हैं। कैपिटल गेन्स और विशेष दर वाली आय इसमें शामिल नहीं है। हर व्यवस्था के कार्ड में दिखने वाला महीने का टैक्स लगभग उतना है जितना एम्प्लॉयर TDS के रूप में काटता है। रिफ़ंड का स्टेटस incometax.gov.in पोर्टल पर लॉग-इन करके (e-File → Income Tax Returns → View Filed Returns) देखें। ITR फ़ाइल करने से पहले किसी टैक्स विशेषज्ञ से मिलान ज़रूर करें।