भारत इनकम टैक्स कैलकुलेटर India Income Tax Calculator

टैक्स ईयर 2026-27 (FY 2026-27) या FY 2025-26 के लिए अपना इनकम टैक्स नई व्यवस्था (new regime) और पुरानी व्यवस्था (old regime) दोनों में निकालें, और देखें कि किसमें आपका ज़्यादा पैसा बचता है।

टैक्स ईयर

इनकम-टैक्स एक्ट, 2025: 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की आय, जिसे पहले FY 2026-27 कहते थे और जिसका असेसमेंट AY 2027-28 में होता।

₹

सालाना, टैक्स से पहले, अपने एम्प्लॉयर या पुराने एम्प्लॉयर से

₹

आपकी स्लैब दरों पर टैक्स लगता है। कैपिटल गेन्स या क्रिप्टो नहीं।

उम्र
₹

आपकी सैलरी का हिस्सा (Form 16 में शामिल), दोनों व्यवस्थाओं में सीमा तक घटाया जाता है

पुरानी व्यवस्था की कटौतियाँ
₹

अधिकतम ₹1,50,000

₹

अधिकतम ₹25,000, जिसमें ₹5,000 तक के हेल्थ चेक-अप शामिल हैं

₹

अधिकतम ₹25,000

₹

जिस घर में आप रहते हैं, अधिकतम ₹2,00,000

₹

अपना NPS, दान, एजुकेशन लोन का ब्याज… (s.124(3), 133, 129; old 80CCD(1B), 80G, 80E)

आपके लिए बेहतर
नई व्यवस्था
आपकी बचत
₹1,05,300
हर महीने का टैक्स (कम वाली व्यवस्था)
₹8,125

नई व्यवस्था कम टैक्स

कुल आय
₹15,00,000
स्टैंडर्ड डिडक्शन
− ₹75,000
कटौतियाँ
₹0
टैक्सेबल आय
₹14,25,000
स्लैब के हिसाब से टैक्स
₹93,750
रिबेट (से. 156, पुराना 87A) / रिलीफ
₹0
हेल्थ और एजुकेशन सेस (4%)
₹3,750
कुल टैक्स
₹97,500
हर महीने
₹8,125
स्लैब-दर-स्लैब
  • ₹0–₹4L: 0% = ₹0
  • ₹4L–₹8L: 5% = ₹20,000
  • ₹8L–₹12L: 10% = ₹40,000
  • ₹12L–₹14.25L: 15% = ₹33,750

पुरानी व्यवस्था

कुल आय
₹15,00,000
स्टैंडर्ड डिडक्शन
− ₹50,000
कटौतियाँ
− ₹1,75,000
टैक्सेबल आय
₹12,75,000
स्लैब के हिसाब से टैक्स
₹1,95,000
रिबेट (से. 156, पुराना 87A) / रिलीफ
₹0
हेल्थ और एजुकेशन सेस (4%)
₹7,800
कुल टैक्स
₹2,02,800
हर महीने
₹16,900
स्लैब-दर-स्लैब
  • ₹0–₹2.5L: 0% = ₹0
  • ₹2.5L–₹5L: 5% = ₹12,500
  • ₹5L–₹10L: 20% = ₹1,00,000
  • ₹10L–₹12.75L: 30% = ₹82,500

टैक्सेबल आय और टैक्स को नज़दीकी ₹10 तक राउंड किया जाता है (से. 516)।

कैसे इस्तेमाल करें

  1. टैक्स ईयर चुनें: टैक्स ईयर 2026-27 (इनकम-टैक्स एक्ट, 2025) या FY 2025-26 (AY 2026-27, पुराना 1961 वाला एक्ट)।
  2. अपनी सालाना ग्रॉस सैलरी या पेंशन (Form 16 वाली) और ब्याज जैसी दूसरी आय अलग-अलग लिखें, और अपनी उम्र का वर्ग चुनें। स्टैंडर्ड डिडक्शन सिर्फ़ सैलरी या पेंशन पर मिलता है।
  3. अगर एम्प्लॉयर आपके NPS खाते में पैसा डालता है तो वह राशि और अपना बेसिक + DA लिखें। फिर पुरानी व्यवस्था की कटौतियाँ भरें: 80C, अपने परिवार और माता-पिता का हेल्थ इंश्योरेंस, होम लोन ब्याज, HRA छूट और बाकी।
  4. देखें कि कौन-सी व्यवस्था बेहतर है और कितनी बचत होती है। हर व्यवस्था के कार्ड में कुल टैक्स, महीने का टैक्स और स्लैब-दर-स्लैब हिसाब मिलता है।

टैक्स ईयर 2026-27: क्या बदला

1 अप्रैल 2026 से इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 ने 1961 वाले एक्ट की जगह ले ली है। अब जिस साल में कमाई होती है उसे सीधे "टैक्स ईयर" कहते हैं, इसलिए जो आय पहले FY 2026-27 कहलाती थी (जिसका असेसमेंट AY 2027-28 में होता), वह अब टैक्स ईयर 2026-27 है। दरें नहीं बदलीं, पर सेक्शन नंबर बदल गए: रिबेट अब सेक्शन 156 (पुराना 87A), 80C सेक्शन 123, 80D सेक्शन 126, एम्प्लॉयर का NPS सेक्शन 124 और होम लोन ब्याज सेक्शन 22 (पुराना 24(b)) है।

नई व्यवस्था के टैक्स स्लैब (टैक्स ईयर 2026-27)

सैलरी या पेंशन पाने वालों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है (सैलरी इससे कम हो तो उतना ही)। सेक्शन 156 (पुराना 87A) का रिबेट (₹60,000 तक) ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर टैक्स शून्य कर देता है।

  • ₹4,00,000 तक: शून्य
  • ₹4,00,001 – ₹8,00,000: 5%
  • ₹8,00,001 – ₹12,00,000: 10%
  • ₹12,00,001 – ₹16,00,000: 15%
  • ₹16,00,001 – ₹20,00,000: 20%
  • ₹20,00,001 – ₹24,00,000: 25%
  • ₹24,00,000 से ऊपर: 30%

पुरानी व्यवस्था के टैक्स स्लैब (60 साल से कम)

60 से 80 साल की उम्र में बेसिक छूट ₹3,00,000 और 80 साल से ऊपर ₹5,00,000 है। स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 है, और रिबेट से ₹5 लाख तक की टैक्सेबल आय पर टैक्स शून्य हो जाता है।

दोनों व्यवस्थाओं में 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस लगता है, और ₹50 लाख से ऊपर की आय पर सरचार्ज भी। टैक्सेबल आय और टैक्स नज़दीकी ₹10 तक राउंड होते हैं (सेक्शन 516)।

  • ₹2,50,000 तक: शून्य
  • ₹2,50,001 – ₹5,00,000: 5%
  • ₹5,00,001 – ₹10,00,000: 20%
  • ₹10,00,000 से ऊपर: 30%

कटौतियाँ जो कैलकुलेटर गिनता है

  • सेक्शन 123 (पुराना 80C: PF, ELSS, LIC, PPF वगैरह): ज़्यादा से ज़्यादा ₹1,50,000, सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में।
  • सेक्शन 126 (पुराना 80D, हेल्थ इंश्योरेंस): आपके, जीवनसाथी और बच्चों की पॉलिसी पर ₹25,000 (इनमें कोई 60 या ज़्यादा का हो तो ₹50,000), और माता-पिता की पॉलिसी पर अलग से ₹25,000 (माता या पिता 60 या ज़्यादा के हों तो ₹50,000)। हेल्थ चेक-अप ₹5,000 तक इन्हीं सीमाओं में गिना जाता है।
  • अपने रहने वाले घर के होम लोन का ब्याज, सेक्शन 22 (पुराना 24(b)): ₹2,00,000 तक; लोन मरम्मत के लिए हो या घर लोन वाले साल के 5 साल बाद तक न बना हो तो ₹30,000 तक। सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में।
  • एम्प्लॉयर का NPS योगदान, सेक्शन 124 (पुराना 80CCD(2)): यह आपकी सैलरी का हिस्सा है और Form 16 की ग्रॉस सैलरी में पहले से शामिल होता है (आपकी रकम में न हो तो बॉक्स पर टिक करें)। कैलकुलेटर इसे घटाता है: नई व्यवस्था में बेसिक + DA का 14% तक, पुरानी में 10% (केंद्र या राज्य सरकार के एम्प्लॉयर के लिए 14%)।

उदाहरण: किसमें कितना टैक्स

₹12,75,000 सालाना सैलरी, कोई कटौती नहीं: नई व्यवस्था में ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल आय ₹12,00,000 रहती है, और रिबेट से टैक्स ₹0 बनता है। पुरानी व्यवस्था में यही टैक्स ₹1,87,200 है।

₹15 लाख सैलरी, 80C में ₹1,50,000 और 80D में ₹25,000: नई व्यवस्था में कुल टैक्स ₹97,500, पुरानी में ₹2,02,800। यहाँ नई व्यवस्था में ₹1,05,300 की बचत है।

इसी ₹15 लाख पर अगर ₹2,00,000 होम लोन ब्याज और ₹2,00,000 HRA छूट व दूसरी कटौतियाँ भी हों, तो पुरानी व्यवस्था में टैक्स ₹91,000 रह जाता है, जबकि नई में ₹97,500। अब पुरानी व्यवस्था ₹6,500 सस्ती पड़ती है।

ध्यान दें

ये अनुमान भारत में रहने वाले (resident) व्यक्तियों की सैलरी और स्लैब-रेट वाली दूसरी आय के लिए हैं। कैपिटल गेन्स और विशेष दर वाली आय इसमें शामिल नहीं है। हर व्यवस्था के कार्ड में दिखने वाला महीने का टैक्स लगभग उतना है जितना एम्प्लॉयर TDS के रूप में काटता है। रिफ़ंड का स्टेटस incometax.gov.in पोर्टल पर लॉग-इन करके (e-File → Income Tax Returns → View Filed Returns) देखें। ITR फ़ाइल करने से पहले किसी टैक्स विशेषज्ञ से मिलान ज़रूर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या टैक्स ईयर 2026-27 वही है जो FY 2026-27 या AY 2027-28 है?

टैक्स ईयर 2026-27 में वही आय आती है जिसे पहले FY 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027) कहते थे और जिसका असेसमेंट AY 2027-28 में होता। इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 ने "पिछला साल" (FY) और "असेसमेंट ईयर" (AY) की जगह एक ही "टैक्स ईयर" रखा है, इसलिए अब कोई असेसमेंट ईयर नहीं है। इसका रिटर्न 2027 में भरा जाएगा। बजट 2026 ने स्लैब, रिबेट, स्टैंडर्ड डिडक्शन, सरचार्ज और सेस नहीं बदले; बदले हैं सिर्फ़ कानून और सेक्शन नंबर।

क्या टैक्स ईयर 2026-27 में ₹12 लाख तक की आय टैक्स-फ़्री है?

नई व्यवस्था में हाँ। सेक्शन 156 (पुराना 87A) के रिबेट से ₹12,00,000 तक की टैक्सेबल आय पर टैक्स शून्य हो जाता है। ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ें तो ₹12,75,000 तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं। कैपिटल गेन्स जैसी विशेष दर वाली आय पर यह रिबेट लागू नहीं होता।

मुझे कौन-सी व्यवस्था चुननी चाहिए?

नई व्यवस्था में दरें कम हैं पर कटौतियाँ लगभग नहीं मिलतीं। अगर आप सेक्शन 123 (पुराना 80C), सेक्शन 126 (पुराना 80D), HRA और होम लोन ब्याज जैसी बड़ी कटौतियाँ लेते हैं तो पुरानी व्यवस्था सस्ती पड़ सकती है। ऊपर अपने आँकड़े डालें: कैलकुलेटर दोनों की तुलना करके बचत दिखाता है।

क्या इसे FY 2025-26 (AY 2026-27) के रिटर्न के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं?

हाँ: टैक्स ईयर में FY 2025-26 (AY 2026-27) चुनें। उस साल की आय पर अब भी इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 लागू है, इसलिए पुराने सेक्शन (87A, 80C, 80D, 24(b)) चलते हैं, और HRA की 50% सीमा सिर्फ़ मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई के लिए है। स्लैब, रिबेट, स्टैंडर्ड डिडक्शन, सरचार्ज और सेस टैक्स ईयर 2026-27 जैसे ही हैं, इसलिए टैक्स उतना ही बनता है।

क्या एम्प्लॉयर का NPS योगदान नई व्यवस्था में घटता है?

हाँ। आपके NPS खाते में एम्प्लॉयर का योगदान (सेक्शन 124, पुराना 80CCD(2)) उन गिनी-चुनी कटौतियों में है जो नई व्यवस्था में भी मिलती हैं: बेसिक सैलरी + DA का 14% तक। पुरानी व्यवस्था में सीमा 10% है, केंद्र और राज्य सरकार के एम्प्लॉयर के लिए 14%। यह आपकी सैलरी का हिस्सा है और Form 16 की ग्रॉस सैलरी में पहले से शामिल होता है, इसलिए Form 16 वाली रकम ही लिखें। अगर आपकी रकम में यह नहीं है (जैसे CTC ब्रेक-अप से), तो NPS वाले खाने के नीचे का बॉक्स टिक करें, कैलकुलेटर इसे जोड़ देगा। आपका अपना NPS योगदान (सेक्शन 124(3), पुराना 80CCD(1B)) सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में गिना जाता है।

मार्जिनल रिलीफ क्या है?

अगर आपकी आय किसी सीमा से थोड़ी ही ऊपर है, तो मार्जिनल रिलीफ पक्का करता है कि बढ़ा हुआ टैक्स बढ़ी हुई आय से ज़्यादा न हो। यह नई व्यवस्था के रिबेट के लिए ₹12 लाख पर, और सरचार्ज के लिए ₹50 लाख, ₹1 करोड़, ₹2 करोड़ और (सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था में, क्योंकि नई में सरचार्ज 25% पर रुक जाता है) ₹5 करोड़ पर लागू होता है। कैलकुलेटर इसे अपने आप लगाता है।

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